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अप्रैल, 2023 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

आर्क बैक्टीरिया 🦠🦠🦠🦠☀️

                    ( संकेत:- प्रतिकात्मक चित्र)  बैक्टीरिया विशिष्ट होते हैं,क्योंकि ये कुछ अत्यधिक रूक्स आवासों में रहते हैं जैसे अत्यधिक लवणीय क्षेत्र गर्म जलस्रोत और दलदली क्षेत्र। एक भिन्न कोशिका भित्ति संरचना की उपस्थिति के कारण अर्की बैक्टीरिया अन्य जीवाणुओं से भिन्न होते हैं। यह लक्षण चरम परिस्थितियों में इनकी उत्तजीविता के लिए उत्तरदायि होते हैं। कोशिका झिल्ली में लिपिड की शाखित श्रृंखला होती हैं,जो झिल्ली की तरलता को घटाते हैं। अर्की बैक्टीरिया में आनुवंशिक अनुक्रम में इंट्रोन   होते हैं । आर्की बैक्टेरिया को तीन समूहों में बांटा गया हैं👇👇 1. मैथेनोजेंस 2. लवणीय 3. तापअम्ल रागी 1. मैथेनोजेंस :-                         ये जीवाणु दलदली इलाको में पाए जाते हैं।ये CO2, मेथेनॉल और फॉर्मिक अम्ल को मेथेन में रूपांतरित कर देता हैं। इसी लिए इसे  मैथेनोजेंस कहा जाता हैं। ये जीवाणु जुगाली करने वाले जानवरों को आहरनाल में पाए जाते हैं , तथा ये इन जंतुओं के गोब...

बॉडी फ्लूड्स (body fluids 🩸🩸)

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       बॉडी फ्लूड्स (शरीर तरल) सभी सजीव  कोशिकाओं जीवित रहने के लिए  पोषक पदार्थो की  जरूरत होती हैं और इन पोषक पदार्थो के पाचन से अपशिष्ट और हानिकारक पदार्थ भी बनते हैं,जो की शरीर के लिए बहुत हानिकारक होते हैं। जिस कारण उन्हे शरीर से निरंतर बाहर निकाला जाता हैं जो की एक निश्चित प्रक्रिया द्वारा होता हैं। जैसे:-  सरल जीवों ( सिलेंट्रेटा व स्पंज ) में इस प्रक्रिया के लिए देहगुहा होती हैं। जटिल जीवों में इस प्रकार की प्रक्रिया के लिए सबसे बॉडी में विशिष्ट प्रकार का तरल पाया जाता है। जटिल जीव जैसे मानवों में इस प्रकार के कार्य के लिए सबसे सामान्य रूप से पाया जाने वाला तरल रुधिर (blood) हैं।  आज हम रक्त के बारे में बात करेंगे। **BLOOD (रुधिर) यह एक तरल संयोजी उत्तक है, जो तरल मैट्रिक्स, प्लाज्मा, व  कोशिकाओं से मिलकर बना होता हैं।रुधिर में प्लाज्मा 55% और अन्य भाग 45 % होते हैं। ***प्लाज्मा(plasma)  प्लाज्मा, यह हमारी बॉडी में पाए जाने वाले तरल में से एक हैं, जो की निर्जीव पदार्थ होता हैं और कोशिकाओं के बीच में पाया जाता ह...

माइकोप्लाज्मा (MYCOPLASMA)

इस एककोशिकीय प्रोकेरियोट्स की खोज ई. नोकार्ड और ई. आर. रॉक्स नामक दो फ्रांसीसी वैज्ञानिकों ने    प्लूरोन्युमोनिया से ग्रसित मवेशियों के प्लूरल द्रव में खोजा था। ये बहुरूपी होते हैं। इन्हे PPLO   या पादप जगत के जोकर  भी कहते हैं। बोरेल और उनके साथी ने मिलकर इस बहुरूपी जीव को एस्टेरोकोकस मायकोइडस नाम दिया था । नोवाक  ने सन् 1929 में एस्टेरोकोक्स मायकॉइड्स को माईकोप्लास्मा  वंश में रखा । ऐसे सभी जीव अब माइकोप्लाज्मा कहलाते हैं। कभी कभी इन्हे एक अलग वर्ग मॉलिक्युटा में रखा जाता हैं। माइकोप्लाज्मा जंतुओ और पादप दोनो को संक्रमित करते हैं। सामान्यतया: ये मिट्टी,मलजल , पादप और जंतुओं में पाए जाते हैं। संरचना  (structure) :-   ये एककोशिकीय सबसे सरल मुक्त जीवी प्रोकेरियोट होते हैं। इनमे कोशिका भित्ति का अभाव होता हैं ।इसी कारण ये अत्यधिक बहुरूपी होते हैं। इनका कोई रूप निश्चित नही होता हैं ये कही रूप में हो सकते हैं जैसे गोलाकार, कनिकाए, तंतुमय , गोलानू। कोशिका झिल्ली सबसे बाहरी परत होती हैं।यह त्रिस्तरीय ईकाई झिल्ली नुमा संरचना होती हैं। संवर्धन...

THE UNSOLVED MYSTERIES MURDERED CASE 🤔🤔( आरुषि - हेमराज हत्याकांड)

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आप सभी ने आरुषि - हेमराज हत्याकांड के बारे में तो सुना ही होगा ,ये हत्याकांड आज तक का सबसे मिस्टीरियस और रहस्यम  हत्याकांड में से एक हैं, जिसको आज तक कोई सुलझा नहीं पाया हैं👇👇   आज हम बात करेंगे एक ऐसे मर्डर केस के बारे में जिसे आज तक की सबसे अनसुलझी हत्याकांड में से एक माना जाते हैं। आप सभी लोगो ने आरुषि हेमराज हत्याकांड के बारे में तो सुना ही होगा ,जिसके बारे में आज हम बात करने वाले हैं। ये बात हैं 15 मई 2008 की नोएडा के सेक्टर 25 के जलवायु अपार्टमेंट के मकान नंबर L-32 की । ये मकान वहा रहने वाले राजेश तलवार और नूपुर तलवार का था ।पेशे से राजेश तलवार एक डेंटिस्ट थे और इस वक्त वो फोर्टीज हॉस्पिटल में काम करते थे यही नहीं उनका खुद का भी क्लिनिक था जिसपर वो काम करते थे।राजेश और नूपुर के एक 14 साल की लडकी भी थी जिसका नाम आरुषि तलवार था । इन तीन लोगो के अलावा भी उनके मकान में एक और रहता था जिसका नाम था हेमराज , हेमराज उनका नौकर था ,जो की नेपाल से ताल्लुक रखता था । अभी थोड़े दिन पहले ही राजेश ने उसे काम पर रखा था। उ...

भारत की ऐसी झील 🌊जहा मछलियों 🌊से भी ज्यादा मानव कंकाल मिलते हैं🤔☠️☠️

आज हम बात करने वाले हैं एक ऐसी  झील के बारे में जो की उत्तराखंड में समुंद्र तल से 5000 m ऊपर स्थित इस झील को मौत की झील भी कहते हैं। परंतु जो हम बताना चाहते हैं वो ये हैं की इस झील में कही सौ मानव कंकाल बिखरे हुए हैं। जिनको ऐसे पड़े हुए देखना भी बहुत भयानक हैं।इतने सारे मानव कंकाल यहां कहा से आए ,या इतने सारे लोगो की मौत आखिर कैसे हुई। और सोचने वाली बात तो ये हैं की इतने सारे लोग समुंद्र तल से 5000 m की इतनी ऊंचाई पर आखिर ये लोग यहां क्या कर रहे थे । इन सब सवालों का जवाब आज तक एक रहस्य बना हुआ हैं। इस झील की खोज एक ब्रिटिश फॉरेस्ट रेंजर के द्वारा सन् 1941 में को गई थी । लोगो का मानना था की ये सारे कंकाल वर्ल्ड वार 2 के समय जर्मन सैनिकों के हो सकते हैं जो की दुश्मन के बचने के लिए यहां छुपकर रह रहे थे ।लेकिन चारो तरफ अच्छी तरह से जांच करने पर वहा आस पास कोई भी किसी प्रकार का कोई हथियार नही मिला । इस कारण लोगो ने इस बात को नकार दिया ।जब विश्लेसको ने इन कंकालों का अध्ययन किया तो पाया कि ये सारे कंकाल तो इससे भी कही पुराने थे ।अब ये बात सामने आने के बाद लोगो ने अंदाजा लगाना शुरू कर द...